जब मैं 3rd क्लास मैं था उस समय शीबा मेरे लिए सब कुछ थी वो दोस्त तो थी। शीबा एक लड़की थी। एक बार जब हम लंच में पार्क खेल रहे थे उस समय मेरी टक्कर 5th क्लास के रोहन से हो गई, इसके लिए मैने उससे माफ़ी भी मांगी। लेकिन उसने मुझे एक ज़ोर का मुक्का मारा और मैं दूर जाके गिर पड़ा, मेरे मुँह से खून निकलने लगा। तभी राहुल दोड़ के शीबा के पास गया और बुला के पार्क में ले आया। और शीबा भाग के आई और मुझे उठाया, लेकिन इसके बाद जो हुआ यह मेरी जिंदगी का कभी ना भुलाने वाली याद बन गया। रोहन जब मुझे फिर से मारने आया, तब ही शीबा ने ज़मीन से एक ईंट उसके सर पर मारा और उससे लड़ने लगी, और आखरी मैं उसने रोहन के बालो को नोच लिया और उसके सर से बहुत ज्यादा खून निकलने लगा।
और रोहन वह से रोते - रोते भाग गया, और मैं देखता ही रहा। उसके बाद शीबा के परिवार वालो को बुलाया और उससे सजा भी मिली। लेकिन शीबा की वजह से मेरा 5th अच्छे से कटा। और शीबा मेरे साथ सिर्फ 5th क्लास तक रही। उसके बाद मैने उससे कभी नहीं देखा। जाते - जाते उसने ये जरूर कहा की - जब हम बड़े हो जायेंगे तो कॉलेज में मिलनेगे।